18 अप्रैल, 2024 को विज्ञान की दुनिया में एक ऐसी असाधारण खोज हुई जिसने प्राचीन पृथ्वी पर जीवन के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह से बदल दिया। गुजरात के कच्छ जिले की पनंध्रो लिग्नाइट खदान में, वैज्ञानिकों ने एक ऐसे विशालकाय साँप के जीवाश्म अवशेषों को उजागर किया है जो लगभग 47 मिलियन वर्ष पहले, मध्य ईओसीन युग के दौरान, हमारे ग्रह पर विचरण करता था। इस अविश्वसनीय प्राणी को **'वासुकी इंडिकस' (Vasuki Indicus)** नाम दिया गया है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं के शक्तिशाली सर्प देव, वासुकी, और इसकी भारतीय उत्पत्ति को दर्शाता है। यह खोज न केवल एक नई प्रजाति के अनावरण का प्रतीक है, बल्कि यह प्राचीन भारत के पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु और जैव विविधता की हमारी समझ में भी क्रांति ला रही है। वासुकी इंडिकस की लंबाई अनुमानित रूप से 11 से 15 मीटर (लगभग 36 से 49 फीट) तक बताई गई है, जो इसे अब तक ज्ञात सबसे बड़े साँपों में से एक बनाती है। इसकी तुलना अक्सर **टिटानोबोआ (Titanoboa)** से की जाती है, जो कि लगभग 58 से 60 मिलियन वर्ष पहले कोलंबिया में पाया गया अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात साँप है। वासुकी इंडिकस की खोज...
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