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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब तलाक के लिए नहीं लगेगा छह महीने का इंतज़ार

© Ritesh Gupta भारत का न्यायिक ढांचा सदैव से ही एक सतत परिवर्तनशील प्रक्रिया से गुजरता रहा है, जहां समय के साथ कानूनों में संशोधन होते रहे हैं, ताकि वे समाज की बदलती जरूरतों के साथ तालमेल बिठा सकें। हाल ही में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लिया गया एक ऐतिहासिक फैसला एक ऐसे कानून को चुनौती देता है जो दशकों से वैवाहिक विवादों में प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। यह निर्णय विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अनिवार्य छह महीने की प्रतीक्षा अवधि को हटाने से संबंधित है, जो कि तलाक लेने की प्रक्रिया में एक निर्धारित शर्त थी। इस फैसले का महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह लाखों उन दंपतियों के लिए एक बड़ी राहत है जो पारस्परिक सहमति से तलाक लेना चाहते हैं, लेकिन छह महीने की अवधि में मानसिक पीड़ा, अस्थिरता और सामाजिक कलंक से जूझते रहे हैं। न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि दोनों पक्षों की मंशा तलाक लेने की है और विवाह को लेकर कोई विवाद नहीं बचा है, तो कोर्ट अपनी विवेक शक्ति का प्रयोग करते हुए छह महीने की वेटिंग अवधि को माफ कर सकता है। यह फैसला न केवल कानून की भाषा में लचीलापन लाता ...